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Friday, July 6, 2018

NETWORKIN

July 06, 2018 0

 NETWORKING

सुचना वितरण के लिये सबसे अधिक सुरक्षित विधि कंप्यूटर मशीन को आपस में जोड़ना है ! इस प्रकार एक स्थान से दूसरें स्थान तक  पहुचाने के लिए एक से अधिक  कंप्यूटर को जोड़ने पर  बनने वाले  कंप्यूटर के समहू  को  कंप्यूटर नेटवर्क  कहते  है ! नेटवर्क की  अवधारणा  लम्बे समय  से  चली  आरी है ! नेटवर्क को एक (interconnected system ) कहा जाता  है  जिसमे टेलीवीजन बोर्डकास्टिंग  नेटवर्क ,सेलुलर  फ़ोन नेटवर्क , कोरियर  नेटवर्क इत्यादि ! अब  कंप्यूटर को सीधे कंप्यूटर  द्वारा  ही  सूचनाये  प्रदान  करने  के  प्रयास  प्रारंभ  हो गए ! सबसे  पहले  एक  ऐसी  प्रणाली  का विकास  हुआ  जिसमे  दो  कंप्यूटर  में  अतरिक्त  हार्डवेयर  व  सोफ्टवेयर  का प्रयोग  करके  उन्हें  एक  केबल  द्वारा   जोड़  कर सीधे  ही  सूचनाओ  का  आदान  प्रदान  किया  जा  सकता  था ! इसमें कंप्यूटर ,केबल्स के एक जाल में आपस में जुड़े रहते है  और सूचनाओ का आदान-प्रदान जल्दी से होता जाता था ! कंप्यूटर के इस जाल को कंप्यूटर नेटवर्क नाम दिया गया !

कंप्यूटर नेटवर्क  के दो प्रमुख प्रकार -LAN and WAN

  • LAN (Local Area Network ) - इस प्रकार के नेटवर्क छोटे होते है 1 इनका क्षेत्र  एक कमरे में रखे कंप्यूटर अथवा इमारत के विभिन्न  कमरो में रखे कंप्यूटर तक ही सीमित होते है ! इस नेटवर्क में जुड़े कंप्यूटर की संख्या कम होती है  !जब एक से अधिक कंप्यूटर केबल से जुडकर एक नेटवर्क स्थापित करते है , तब यह नेटवर्क LAN कहलाता है ! LAN किसी भी कंप्यूटर नेटवर्क की नीव होता है ! 
  •  WAN (WIDE Area Networking)-WIDE AREA NETWORK का क्षेत्र सीमित नही होता है ! यह कंप्यूटर और नेटवर्क -उपकरणों को पृथ्वी के एक कोने को दुसरे कोने तक जोड़ता है ! एक (WAN ) अनेक Local Area नेटवर्क से निर्मित होता है ! जो आपस में संचार माध्यमो ;जैसे-cable.Telephone Lines , Satttelites के माध्यम से जुड़ा होता है ! इस नेटवर्क का प्रयोग कर के एक स्थान से दुसरे स्थान पर सुचना का अदन -प्रदान कर सकता है ! Internet WAN का एक अच्छा उदहारण है !
  • कंप्यूटर नेटवर्क का वर्गीकरण - 

    कंप्यूटर नेटवर्क को दो भागो में बाटा गया है -  peer-to-peer network , and server based network.
    1. PEER-to-PEER Network

      Peer -to-Peer नेटवर्क  में न तो कोई Dedicated Server होताहै और न ही कंप्यूटर के मध्य  (Hierarchy) क्रम होता  है  सभी कंप्यूटर एक समान होते है ; अत उन्हें peersकहा जाता है ! नेटवर्क का प्रतिएक कंप्यूटर , Client और  Server दोनों के रूप में कार्य करता है  !नेटवर्क का Administrator सम्पूर्ण नेटवर्क को  को  Administrateकरने के लिये उत्तरदाये नही होता है !  peer-to-peer नेटवर्क  को  Work group भी कहा जाता है ! peer-to-peer में 10 या इससे कम कंप्यूटर होते है ! 
    2. Server Based Networks

      •  Network Topology 

          नेटवर्क स्थापित करने में एक से अधिक कंप्यूटर की आवशकता  होती है ! तथा इन कंप्यूटर को जोड़ने के तरीकों को नेटवर्किंग की भाषा में नेटवर्क टोपोलॉजी  कहते है ! यह निम्न प्रकार की होती है ! 
        1. Bus Topology -- Bus Topology को Linear Topology भी कहते है ;क्योकि इसमें सभी कंप्यूटर सीधी लाइन में जुड़े होते है ! यह कंप्यूटर की नेटवर्किंग करने का सबसे आसन तरीका है ! इसमें सभी कंप्यूटरों को एक ही केबल जिसे (Bus) भी कहा जाता है के मध्यम से एक ही लाइन में जोड़ा जाता है ! इस केबल को (Trunk) अथवा Communication Channel भी कहा जाता है !बस टोपोलॉजी में यदि इस केबल में कोई खराबी आ जाती ह तो इस टोपोलॉजी पर आधरित नेटवर्क कार्य करना बन्द कर देता है! बस टोपोलॉजी नेटवर्क में एक समय में एक ही कंप्यूटर डेटा Transmit कर सकता है !                                                                                                                            

        2.Ring Topology

      Ring Topology , Bus Topology के समान होते है ! दोनों में अंतर यह है की बस टोपोलॉजी में डेटा Open Circuit ने  जाता है , जबकि Ring topology में डेटा एक Closed  Circuit में होता है !इस टोपोलॉजी में बस टोपोलॉजी की भाति  इसमें केबल का कोंई भी End Terminated नही होता है ! नेटवर्क में डेटा Signal Loop में एक ही दिशा में Travel करते है और प्रतिएक कंप्यूटर से होकर गुजरते है !प्र्तियेक  कंप्यूटर एक Repeater की भाति  कार्य करता है और डेटा -सिगनल को Boost अथार्त Amplify करके अगले कंप्यूटर को भेजता है ! इस टोपोलॉजी में अगर एक कंप्यूटर के फ़ैल (Fail) होने  का  प्रभाव सम्पूर्ण नेटवर्क पर  पड़ता है !

      • Star Topology

        Star Topology की विशेष बात यह होती है की इसमें कंप्यूटर से जुड़े केबल के टुकड़े को Centralized Device जिसे Hub कहते है ,से जोड़ा जाता है ! इस नेटवर्क में यदि HUB fail हो जाता है तो पूरा नेटवर्क Down हो जाता है ! परन्तु यदि HUB से जुड़ा कोई एक कंप्यूटर अथवा cable fail हो जाता है ,तो कवेल कंप्यूटर नेटवर्क से अलग हो जाता है !

       
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Monday, July 2, 2018

July 02, 2018 0
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Friday, June 29, 2018

DATA REPRESENTATION

June 29, 2018 0

 कंप्यूटर में डेटा रिप्रजेंटेशन (Data)

 कंप्यूटर डेटा को एसे रूप में संचित करता है , जिसको मानव सीधे-सीधे नही समझ सकता है ! इसीलिए कंप्यूटर में input और output Interface की आवश्यकता होती है ! प्रतिएक कंप्यूटर , अंको ,अक्षर तथा अन्य विशेष चिन्ह को एक कोड के रूप में संचित करता है ! ये कोड दो अंको 0 व 1 से निर्मित होते है !
कंप्यूटर केवल Machine Language को ही समझ सकता है Machine Language में 0 और 1 अंको का प्रयोग होता है ! अंको के प्रयोग को जानने के लिये हमें Number System को समझ ना होगा ! 
मूल रूप से number system दो प्रकार के होते है - NON-POSITIONAL NUMBER SYSTEM & POSITIONAL NUMBER SYSTEM .

 
NON-POSITIONAL NUMBER SYSTEM

प्रारम्भिक कल  में गिनती करने के लिये मानव अपनी ऊँगली का प्रयोग करता था ! इसके बाद उसने कंकडों और छड़ी का प्रयोगे गिनती करने के लिये प्रारम्भ किया ! गिनती करने की इस विधि में योगात्मक (Additive) अथवा NON-POSITIONAL NUMBER SYSTEM का प्रयोग किया जाता है !
इस पद्धति में यदि हम अंक 1 के स्थान पर ‍‌Ⅰ चिन्ह का प्रयोग करें , तो अंक 2 के लिए , अंक 3 के लिए , अंक 4 के लिये ⅢⅠ , अंक 5 के  लिए ⅢⅡ आदि का प्रयोग किया जएगा ! इस पद्धति में प्रत्येक चिन्ह एक ही मान दर्शाता है !  इस number सिस्टम के साथ विभिन्न अंकगणित प्रिक्रियाओ को करना अत्यन्त कठिन था ! इस लिये POSITIONAL NUMBER SYSTEM का विकाश हुआ !

 POSITIONAL NUMBER SYSTEM

POSITIONAL NUMBER SYSTEM  में कुछ विशेष चिन्ह का प्रयोग किया जाता था ! ये विशेष चिन्ह  Digit कहलाते है ! इन डिजिट्स का मान संख्या में इन की स्थिति पर निर्भर करता है ! वर्तमान में POSITIONAL NUMBER SYSTEM का ही प्रयोग किया जा रहा है ! इस number सिस्टम में डिजिट का उस स्थिति के साथ -साथ प्रयोग किये जा रहे नंबर सिस्टम पर निर्भर करता है !

Type Of Number System

  1. Decimal number System
  2. Binary Number System
  3. Octal Number System 
  4. Hexadecimal Number System
  • Decimal Number System

    दशमलव नंबर सिस्टम में 0 से 9 तक के अंक प्रयोग किये जाते है अथार्त -
    0,  1,  2,  3,  4,  5,  6,  7,  8,  9
    इस प्रकार हमनें देखा की 0 से 9 तक कुल 10 अंक प्रयोग किये गये ! इसलिये दशमलव number सिस्टम का आधार 10 होता है ! इस नंबर सिस्टम के अन्तर्गत हम जो भी संख्या लिखते है , उसका आधार 10 दर्शाता है ,जैसे-यहाँ पर 761891 संख्या है और 10 उसका आधार है जो यह दर्शाता है की यह संख्या Decimal Number System में है ! (761891) (base)10

  • Binary Number System

 इस number सिस्टम का प्रयोग मुख्यतः कंप्यूटर में कार्य करने के लिये किया जाता है ! इस number सिस्टम में 0 व 1 अंक का प्रयोग किया जाता है ! कंप्यूटर में प्रत्येक सदेश 0 व 1 के रूप में स्टोर होता है ! इस प्रकार इस में केवल दो अंक प्रयोग किये जाते है ! इस लिए Binary नंबर सिस्टम का आधार(base) दो दर्शाया जाता है ! -  (1010)2
  • Octal Number System

    इस नंबर सिस्टम के अन्तर्गत 0 से 7 के अंको का प्रयोग किया जाता है , अथार्त - 
    0,   1,  2,  3,   4,  5,  6,  7 
    इस में कुल 8 अंको का प्रयोग किया जाता है इस number सिस्टम का आधार(base) 8 दर्शाया जाता है ! बहुत कंप्यूटर जैसे -IBM-7090 , PDP7, PDP8 आदि में Octal Number  System का प्रयोग सुचना का अदन -प्रदान करने के लिये किया जाता है !
    (3027)8 

    Hexadecimal Number System

    यह एक ऐसा नंबर सिस्टम है जिसमे अंको के साथ -साथ अंग्रेज़ी वर्णमाला में प्रयोग किये जाने वाले अक्षर A,  B,  C,  D,  E,  F भी प्रयोग किये जाते है ! इन NUMBER सिस्टम का आधार 16 होता है ! 16 आधार (base)के लिये यह NUMBER सिस्टम 0,  1,  2,  3,  4,  5,  6,  7,  8,  9,  तक के अंक तथा 10,  11,  12,  13,  14, 15 के लिये क्रमशः अंग्रेज़ी वर्णमाला के अक्षर का प्रयोग किया जाता है !
                                               (ED6) base(16)
     


  • Conversion from Decimal Number System to Binary Number System

Decimal Number सिस्टम में लिखी  गई संख्या को Binary Number सिस्टम में बदलने के लिये उस संख्या को 2 से भाग (Devide) करते है ! संख्या को तब तक devide करते है जब तक भागफल (QUOTIENT ) 0 प्राप्त नही हो जाता है !
 यह हम (79)10 को Binary number में convert करें गे !
                                  भाग                                      भागफल                           शेषफल
पहली                        79/2                                             39                                   1
दूसरी                         39 /2                                            19                                  1
तीसरी                        19/2                                              9                                   1
चौथी                           9/2                                               4                                   1
पाचवीं                        4/2                                                2                                   0
छठी                          2/2                                                 1                                   0
सातवीं                       1/2                                                  0                                   1   ↑
                                           (1001111) base(2)
  इसे हम नीचे से उपर की तरफ लिखते है !
  • Conversion form Binary Number System to Decimal Number System 

    Binary number system को Decimal number सिस्टम में बदलने के लिये हम Binary संख्या को left to right दो (2) घात(DIMENSION) को 0 से एक  एक बढ़कर तब तक गुणा ( MULTIPLICATION) कर के आपस में जोड़ते रहते है जब तक Binary संख्या का बाया (left) अंक न बचे !
    अब हम (11011001)2 को Decimal number सिस्टम में बद्लेगे !

    संख्या जो दशमलव वाली binary number सिस्टम की संख्या है तो decimal number सिस्टम की तरह बद्लेगे ! 
    इसे प्रकार हम सभी number सिस्टम को एक -दुसरे में बदल सकते है !



     



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Wednesday, June 20, 2018

Components to Information Technology

June 20, 2018 0

Components-

Information विशव की धुरी है ! सम्पूर्ण विशव सूचनाओ के इर्द-गिर्द ही मंडरा रहा है !सूचनाओ का अपना एक विस्तृत स्थान है ,सूचनाओ की कोई सीमा नही होती है ! इन विभिन्न प्रकार की सूचनाओ को प्राप्त करने के लिए प्रयोग में लाये जाने वाली तकनीक Information Technology  कहलाती है ! सूचनाओ को एक स्थान से दुसरे स्थान पर भजने के लिए नये प्रयोग हो रहे है ! डाक सेवा , टेलीफ़ोन ,रेडियो , एव उपग्रह संचार प्रणाली इन्ही प्रयत्न का परिणाम है !  
Information Technology के प्रमुख components है - Hardware & software

Hardware

कंप्यूटर के सभी भाग जिन्हें हम छु व देख सकते है ,हार्डवेयर कहलाते है ! कंप्यूटर के बहार व अंदर के सभी भाग ,कंप्यूटर की input व output यूक्तिया आदि सभी हार्डवेयर है !
वे युक्तियाँ (Devices),जो कंप्यूटर को चलाये जाने के लिये अवश्यक है ,Standard Devices कहलाती है ; जैसे-की -बोर्ड ,फ्लापी ड्राइव ,हार्डडिस्क आदि एवम् इन  Devices के अतिरिक्त वे  Devices जिनको कंप्यूटर से जोड़ा जाता है ; जैसे - माउस , प्रिंटर, आदि Peripheral devices कहलाती है ! Standard Devices व Peripheral devices दोनों मिलकर जो सिस्टम बनती है हार्डवेयर कहलाते है !

Software

कंप्यूटर व उस से जुडी device से कार्य   करने के लिये software का प्रयोग किया जाता है ! इन्हे देखा नही जा सकता है ! कंप्यूटर भाषा में बनाया जाता है , कंप्यूटर पर कार्य करने के लिये एक विधि एवम् व्यवस्थित निर्देशओ के समहू को progrem या softwaer कहते है ! 

Hardware & Its Functioning

Hardwaer को तीन भगा में बाटा गया है -
1. Input Unit
2.Output Unit
3.Central Processing Unit

1.Input Unit 

इनपुट यूनिट user से data और Instruction को Accept कर, उन्हें प्रोसेस करने के लिये प्रोसेसिंग यूनिट को पास कर देता है ! प्रोसेसिंग यूनिट Instruction के आधार पर Data को Process करता है !
 कंप्यूटर सिस्टम में Data और Instruction को किसी input device के माध्यम से input किया जाता है !
input device सबसे पहले input किए गए डेटा  और instruction को 0 और 1 यानी Binary रूप में Convert करता है ! और फिर उन्हें Memory में input कर देता है ! 

2.Output Unit

आउटपुट यूनिट प्रोससे हुए data व Information  को देखता है ,जो CPU दुआरा भेजा जाता है ! जब Information Monitor स्क्रीन पर show होती है ! तो उसे Information की Soft copy कहते है ,तथा जब Information  को printer के दुआरा print करते है ,तो उसे Hard copy कहते है ! Output Dvice का प्रयोग कंप्यूटर दुआरा Proces कये गए data और instruction व Information अथवा result और कंप्यूटर में स्टोर किये गए डेटा को प्रदर्शित करने के लिये क्या जाता है ! Monitor और Printer सर्वाधिक लोकप्रिय व प्रचलित output device है !

3.Central Processing Unit

Central Processing Unit input यूनिट दुआरा प्राप्त instruction के आधार पर Data को Process क्र परिणाम को output यूनिट को भेज देता है ! डेटा को प्रोसेस करने से पूर्व प्रोसेसिंग यूनिट यह भी निर्णय लेता है की कौन -सा Instruction, Arithmetic Unit है या Logical  Unit है ! CPU का प्रमुख कार्य Procesing Jobs को  पूरा करना है ! छोटे कंप्यूटर के processing यूनिट में साधारण एक ही प्रोसेसर होता है ; जबकि बड़े कंप्यूटर को processing यूनिट में एक से अधिक प्रोसस्सोर्स हो सकते है , जिसमे अलग -अलग  दए गए प्रोसेस Execute किए जाते है !

Type Of Input Devices

 वे deviceजिनकी सहायता से कंप्यूटर को Instruction भेजी जाती है , input devices कहलाती है !
Mouse, Tracker Ball, Joystick, Hand-Heid Terminal, Microphone आदि input devices है !

key-Board :- कंप्यूटर का Key-Board एक सामान्य टाइपराइटर के Key - Board के समान होता है ,परन्तु इस में  'किज' की संख्या अधिक होती है! इस Key -board पर काम करना आसन होता है ! यदि कसी key को आधा सेकंड से दबाय रखे तो वह अपने आप दोहराने  लगती है ! की -बोर्ड दुआरा भेजा जाने वाला डेटा 0 तथा 1 बिट में बदल कर दो प्रकार से CPU में जाता है !इस आधार पर की -बोर्ड दो प्रकार के होते है ! Serial-key board , Parallel-key board !

Mouse :-  इसे मिक्रोमाउस भी कहते है ! माउस प्लास्टिक के चूहे के आकार का होता है ! पर्सनल कंप्यूटर के साथ उपयोग में आने वाले माउस में एक ball लगी होती है ! इस के Axis पर दो चक्के होते है ! जैसे-जैसे माउस को ड्राइंग पर घुमया जाता है , वैसे-वैसे कर्सर स्क्रीन पर घूमता है ! 

Tracker Ball , Joystick , Microphone, 

 Type of output devices :- 

VISUAL DISPLAY UNIT , CRT MONITER , LCD MONITER ,  PRINTERS
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Sunday, June 17, 2018

Types of computers

June 17, 2018 0
अनुप्रयोग के आधार पर कंप्यूटरों के प्रकार (types of computers on the basis of application)
अनुप्रयोग के आधार पर कंप्यूटर को तीन भागो में बाटा गया है !
1.Analog computer  2.Digital computer  3.Hybrid computer

Analog computer

 एनालॉग कंप्यूटर एक ग्रीक भाषा का सब्द है ! जिस का अर्थ किन्ही दो राशियो में समरूपता को तलाश करना है ! एनालॉग कंप्यूटर का प्रयोग किसी भौतिक क्रया का रूप बना कर लगातार जरी रखने के लिये किया जाता है
किसी भौतिक क्रया को गणितीय समीकरण में परिवर्तित करके एनालॉग कंप्यूटर के एम्प्लीफायर बॉक्स की सहायता से इसके अनुरूप विधुत परिपथ बनाकर इसे पूर्वनिर्धारित प्रक्रिया दुआरा इलेक्ट्रॉनिक मॉडल बनया जाता है ! एनालॉग कंप्यूटर का प्रयोग science व इंजीनियरिंग के छेत्र में  प्रयोग किया जाता है ! क्योंकि इन छेत्र  में Quantities का अधिक प्रयोग होता है! इन कंप्यूटर से पूर्णत: शुद्ध परिणाम प्राप्त नही होता है ! परन्तु  99% तक शुद्ध परिणाम प्राप्त किए जा सकते है ! इन कंप्यूटर में भौतिक मात्राओ( Quantities) जैसे - दाब, तापमान , लम्बाई  आदि को माप कर उनके परिणाम को अंको में परिवर्तित करके देखते है !

Digital computer

डिजिट का अर्थ है -अंक ! डिजिटल पद्धति में अंक अपने स्थान को विस्थापित हो सकते  है ! इलेक्ट्रॉनिक अथवा घडी डिजिटल पद्धति पर ही आधारित है !इन में सभी अंक 8 पर आधरित होती है ! 
डिजिटल कंप्यूटर Binary system पर आधारित होता है !इसमें मेमोरी  के विभिन्न खानों में बाइनरी कोड 0 व 1 के दुआरा switching करके किसी भी अक्षर या अंक की रचना की जाती है ! जिस खाने में बाइनरी कोड 1 के दुआरा सिगनल जाता है ! वह सक्रिये हो जाता है ! डिजिटल कंप्यूटर सभी गणना अंकगणित  को आधार मानकर
करता है डिजिटल कंप्यूटर किसी भी डेटा को बाइनरी में बदल देता है !

Hybrid computer

हाइब्रिड कंप्यूटर का अर्थ - संकरीत अथार्त अनेक गुण -धर्म यूक्त होना ! एनालॉग व डिजिटल दोनों कंप्यूटर के गुणों को मिलाकर हाइब्रिड कंप्यूटर को बनाया गया है ! एनालॉग कंप्यूटर में किसी भी सिस्टम के नियंत्रण के  लिये एक ही छन में दिशा निर्देश प्राप्त हो जाते है ! हाइब्रिड कंप्यूटर इन निर्देश को डिजिटल निर्देश में परिवर्तित 
करने के विषेस यंत्र का प्रयोग करते है ! मॉडल इस प्रकार का एक यंत्र है ! यह एनालॉग संकेत को डिजिटल
संकेत व  डिजिटल संकेत को एनालॉग संकेत में बदलने का काम करता है !




types of computer on the basis of size and technique 

आकार और  तकनीक के आधार पर कंप्यूटर चार प्रकार  के होते है - माइक्रो कंप्यूटर ,मिनी कंप्यूटर , मेनफ्रेम कंप्यूटर और सुपर कंप्यूटर !

Micro Computer


तकनीकी के आधार पर माइक्रो कंप्यूटर सबसे कम कार्य छमता रखने वाला कंप्यूटर , परन्तु यह कार्य  के लिए उपयोगी होता है ! इन कंप्यूटरों के विकाश  में  जो सबसे बड़ा सहयोग हुआ वह था 1970  में माइक्रो प्रोसेसर का अविष्कार ! यह कंप्यूटर छोटे व सस्ते होते है इसलिए ये व्यक्तिगत उपयोग के लिए घर या बाहर किसी भी कार्य में लगाया जा सकते है अत : इन्हे personal computer (p.c) कहते है ! माइक्रो कंप्यूटर में एक ही CPU लगा होता  है !  वर्तमान समय  में माइक्रो कंप्यूटर  का  विकाश  अत्यन्त तीव्र गति से होरा है यह फ़ोन के आकार और यह तक की घडी के आकार में  भी विकशित होरे है !
माइक्रो कंप्यूटर घरो कार्येलये अदि  में प्रयोग किये जाते है माइक्रो कंप्यूटर की सहायता से  कार्येलये का सारा हिसाब -किताब सारी फ़ाइल कंप्यूटर ही  समभालता है !माइक्रो कंप्यूटर का  सबसे प्रचलित रूप  IBM (International Business Machine)है ! 

 

 Mini Computer

Mini computer का आकार लगभग माइक्रो कंप्यूटर जैसे होता है परन्तु कार्य छमता मिनी कंप्यूटर की अधिक होती है ! इसका प्रयोग बैंक व बीमा कम्पनियों आदि में कार्य करने के लिये किया जाता है ! मिनी कंप्यूटर की कीमत माइक्रो कंप्यूटर से अधिक होने के कारण इन्हे व्यक्तिगत रूप से खरीदा नही जा सकता है ! इस कंप्यूटर का प्रयोग मध्यम स्तर की कम्पनियों में किया जाता है ! इस कंप्यूटर पर एक से अधिक यूजर्स (user) कार्य के सकते है !मिनी कंप्यूटर की Memory , speed , एवं कार्य छमता माइक्रो कंप्यूटर से अधिक व मेन फ्रेमकंप्यूटर से कम होती है ! इसमें एक से अधिक C.P.U होते है !
सबसे पहला मिनी कंप्यूटर PDP-8एक रेफ्रीजरेटर के आकार का 18000 डॉलर का था ! जिसे डी.ई.सी (Digital Equipment corporation) ने सन 1965 में बनाया  था ! मिने कंप्यूटर के मुख्य भाग को एक बिल्डिंग में रखा जाता था एवम् उसके साथ कई टर्मिनल जोड़ दिए जाते थे ! मिनी कंप्यूटर के अन्य उपयोग यातायात में यात्रियों के लिये अरक्षित-प्रणाली का संचालन और बैंकों में बैंकिंग के कार्य है !

PDP-8 mini computer

   Main Frame computer

यह कंप्यूटर बहुत अधिक शक्तिशाली होता है इन कंप्यूटर की memory,speed माइक्रो कंप्यूटर व मिनी कंप्यूटर की तुलना में अधिक होती है ! इस कंप्यूटर का प्रयोगे नेटवर्किंग के लिये किया जाता है ! इन कंप्यूटर पर बहुत  से टर्मिनल जुड़े  होते है तथा इन टर्मिनल को कहि पर भी रखा जा सकता है !यदि टर्मिनल को मुख्य कंप्यूटर के पास रखा जाता है जैसे एक ही बिल्डिंग में तो इस प्रकार की नेटवर्किंग को local area networking कहा जाता है यदि कंप्यूटर टर्मिनल को मुख्य कंप्यूटर से दूर रखा जाता है तो उसे wide area networking कहा जाता है ! रेलवे में प्रयोग किये जाने वाले टर्मिनल वाइड एरिया नेटवर्किंग का अच्छा उदहारण है ! 
इस कंप्यूटर की गति टर्मिनलों की सख्या ,तारो की लम्बाई के अनुसार बढाती व घटती रहती है !वास्तव में सभी टर्मिनल मेन फ्रेम कंप्यूटर का  प्रयोग करने के लिये एक लाइन में खड़े होते है , परन्तु अधिक शक्तिशाली होने के कारण मेन फ्रेम कंप्यूटर प्रत्येक टर्मिनल का कार्य इतनी जल्दी करता है की user को यह लगता है की कंप्यूटर  केवल उसी का कार्य कर रहा है ! इस प्रकार work करने को Time Shared System कहते है !
P.C.-A.T./386,486, IBM4381,ICL39 और CDC Cyber सृख्ला मेन फ्रेम कंप्यूटर के मुख्य उदहारण है !

Super Computer

यह कंप्यूटर आधुनिक युग का सबसे शक्तिशाली कंप्यूटर है ! इसमे अनेक C.P.U समान्तर क्रिया को समान्तर प्रक्रिया (parallel processing) कहते है ! विशव का पहला सुपर कंप्यूटर I.L.L.L.I.A.C. है ! 
एक C.P.U दुअरा DATA और प्रोग्राम एक धरा (Stream) में कार्य करने की पारस्परिक विचारधारा 'वोन न्युमान सिद्धन्त ' कहलाती है ! लेकिन सुपर कंप्यूटर नॉन-वोन सिधान्त के आधार पर बनाया जाता है ! सुपर कंप्यूटर अनेक  A.L.U CPU  का एक भाग होता है प्रतिएक A.L.U निशिचित  क्रिया के लिए होता है ! इस प्रकार  के कंप्यूटर में बहुत सी इनपुट व आउटपुट डिवाइस जोड़ी जाती है !
सुपर कंप्यूटर का प्रयोग ,बड़ी वैज्ञानिक और शोध प्रयोगशाला में शोध करने ,मौसम की भविष्यवाणी करने व Animation movie का निर्माण करने के लिये किया जाता है !
25 march 1989 को भारत में Cray-X MP-14 नाम का सुपर कंप्यूटर दिल्ली में स्थापित किया गया था ! इसका प्रयोग मौसम एवम् कृषि सम्बन्धी जानकारी प्राप्त करने के किया गया था ,इस के बाद भारत ने कुछ समय पहले ही सुपर कंप्यूटर बनाने में सफलता प्राप्त की CRAY-2,CRYXM-24  और NEC-500 SUPERCOMPUTER के मुख्य उदहारण है ! वर्तमान में C.D.A.C  ,  PUNE ने परम 10000 कंप्यूटर का निर्माण श्री विजय भटकर के निर्देशन  में हुआ है!' एकम' नामक सुपर कंप्यूटर का  निर्माण भारत दुआरा किया  गया है !...

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Wednesday, June 13, 2018

Development of computer

June 13, 2018 0
कंप्यूटर का विकास (Development of computer)
कंप्यूटर के विकास की प्रक्रिया सन 1946 के बाद से आज तक लगातार चल रही है ! जैसे -जैसे इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे का विकास होता गया वैसे -वैसे कंप्यूटर के विकास में नया चरण प्रारम्भ होता गया !
 कंप्यूटर की पीढ़ीया  (generation of computer)
प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर का निमार्ण  1946 में किया गया ! इसके बाद वर्तमान समय के computer  तक जो भी सुधार हुए ,उन्हें चार भाग में बटा गया है !
प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर(first generation computer ) 
1946 में  USA में पेंनिस्लवेनिया विश्वविद्यालय में इनिओक नाम का इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर स्थापित किया गया ENIAC का पूरा नाम इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटेड एंड केलकुलेटर था !इस कंप्यूटर को जे .पी.इंकर्ट और जॉन डब्लू.माचली की टीम ने बनाया था !
 इनिओक के बाद सन 1951 में यूनिवर्सल एकाउंट कम्पनी के लिये इंकर्ट-माचली ने UNIVAC नाम का कंप्यूटर बनाया !उसके बाद IBM 701 और IBM 605 नामक कंप्यूटर बनाए गए !

दिउतीय पीढ़ी के कंप्यूटर(Second generation computer)
 विलियम शाकली नाम के वैज्ञानिक ने सन 1948 में BELL प्रयोगशाला में ट्रजिस्टर नाम के इलेक्ट्रॉनिक पुर्जे का अविष्कार किया जिस का प्रयोग Second generation computer में किया गया ! इस पीढ़ी के कंप्यूटर को चलाना आसन था !
 Second generation computer मुख्य थे  - UNIVAC 1108 , RCA 501, IBM 700,1401,1620,7094,C.D.C.1604 और ICC-1901 !

Third generation computer

इस कंप्यूटर में ट्रजिस्टर की जगह I.C इंटीग्रेटड सर्किट का प्रयोग किया गया  ! यह अनेक कॉम्पोनेटका कार्य अकेला कर सकती थी !यह पहले कंप्यूटर की तुलना में छोटा हो गया था इस पीढ़ी  के कंप्यूटर में हई  लेवल   
 लेग्वेज जेसे फोरट्रनआदि का प्रयोग होने लगा था !
इस पीढ़ी के मुख्य कंप्यूटर थे -I.C.L-2903,C.P.C-1700

Fourth generation computer

सन 1974 में कंप्यूटर में सर्वाधिक विकास हुआ !इस में I.C के स्थान पर मिक्रोप्रोससर का प्रयोग किया गया !
इस कंप्यूटर में हिंदी ,अंग्रेज़ी,भाषा,व चित्र बनान,साउंड बनना आदि कार्य किया जाता था ! यह कंप्यूटर बिना खराब हुए कई दिन तक कार्य कर सकते थे !
इस पीढ़ी के कंप्यूटर  इस प्रकार थे -                                                                                                       COMMANDOR-PET , DCM-TANDY ,Z.X..SPCTRUM,IBM-PCआदि 

Fifth generation computer

आज विशव में कंप्यूटर को और वकसित करने का प्रयास जरी है , अब तक कंप्यूटर सोच -समझकर निर्णय लेने 
में असमर्थ ह !अज के वैज्ञानिक कंप्यूटर को कृतम बुद्धि के प्रयोगे के दुआरा सोच -समझक निर्णय लेने में सूक्ष्म बनाना चहाते है !जापान के वैज्ञानिक ने इस योजना को knowledge informatio processing system नाम दिया है !  

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Monday, June 11, 2018

History of computer

June 11, 2018 0
कंप्यूटर का इतिहास  (History of computer)
कंप्यूटर का इतिहास बहुत पुरना है ! इस की शरुआत तब हुई ,जब मनुष्य ने गिनने के लिये ऊँगली का उपयोग किया ! इसके बाद 650 बी.सी. में इजिप्ट के नवासी(egyptians) ने पशु पक्षी की आक्रतियो को एक विषेस प्रकार के चिह्न दुआर गुफा में बनाया ! इस के बाद  मनुष्य ने गिनने के लिया अनेक युक्ति के खोजे की !
इस के बाद सबसे आधुनिक गणनात्मक युक्ति अबेकस (Abacus) का निर्माण किया जो की 16 सताब्दी में चीन में हुआ ! यह लकड़ी का आयातकार (Rectangle) फ्रेम होता है ! इस फ्रेम के दो भाग (peart) होते है ! 
Abacus का पहला peart छोटा व दूसरा peart बड़ा राखा गया ! इस फ्रेम में बायीं (left) साइड  से दाये( right) साइड से rod को पार करते हुए तार लगे रहते थे ! इन तारो में मोती पिरोये जाते थे !
इस अबेकस ने गणित विशेषेज्ञो को नयी दिशा प्रदान की इसका प्रयोग चीन ,जापान ,रूस  आदि देश में होने लगा ! सुविधानुसार अबेकस में कुछ परिवर्तन (change) कये गये !
अबेकस के बड़े भाग को अर्थ (Earth) और छोटे भाग को Heaven कहते है ! चीन  में अबेकस का सबसे जादा इस्तमाल (Use) किया जाता है ! जापान में जो अबेकस बनया गया वह चीनी अबेकस का अलग रूप है ! कुछ समय बाद रूस अबेकस का निमार्ण हुआ , यह चीनी व जापानी अबेकस से कुछ भिन्न था !
16 वी सताब्दी में तीन प्रकार के computer की खोज  हुई - 
1.सन 1617 में स्टॉक के गणितज्ञ sir jon nepiyr ने की जिसे नेपियेर बोन के नाम से जाना जाता है ! जिस से जोड़ ,घटा ,भाग ,गुणा बड़ी सरलता से किये जा सकते थे ! यह analogue computer को बनाने में बहुत उपयोगी रहा! 
  2. सन 1620 में जर्मन के विलियन आटरेड ने की जिसे 'स्लाइड-रुल ' के नाम से जाना जाता है !
3. सन 1645 में प्रथम यांत्रिक गणना युक्ति का अविष्कार फ़्रांस में ब्लजे पास्कल ने किया ,जिसे पास्कलीन नाम से जाना जाता है !
इन सब के बाद ब्रिटीश  अविष्कारक चार्ल्स बावेज ने पहली बार सम्पूर्ण computer के कल्पना की ! 
चार्ल्स बावेज का जन्म 1791मेंहुआ ,तथा मृत्यु 1871 में हुई !
सन 1821 में एसी मशीन का मोडल बनाया जो की सभी प्रकार की बीजगणित समीकरण को हल कर सकता था 
इस का नाम डिफेन्स मशीन रखा ! इसे रॉयल एस्ट्रानामिकल सोसाइटी ने aword भी दिया !
इस के बाद चार्ल्स बावेज ने डिफेन्स मशीन का एसा ब्लूप्रिंट बनाया जो आज के कंप्यूटर में देखा जा सकता है !
जैस -ममोरी,इनपुट ,आउटपुट अदि !

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